https://www.youtube.com/c/AIBSNews24

CAA Rules: सीएए कानून में दोहरी नागरिकता को लेकर क्यों फंसा है पेंच, क्या दो-दो देशों के बने रहेंगे नागरिक?

 सार

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने एक याचिका दायर कर मांग की है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019 और नागरिकता संशोधन नियम 2024 पर रोक लगाई जाए। मुस्लिम लीग का कहना है कि 1955 के नागरिकता अधिनियम की धारा 9 और संविधान के अनुच्छेद 9 दोनों स्पष्ट करते हैं कि देश में दोहरी नागरिकता किसी भी तरह से मान्य नहीं है। 




विस्तार

नागरिकता संशोधन अधिनियम-2019 (सीएए) कानून पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करता है। सीएए कानून के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से छह गैर-दस्तावेज गैर-मुस्लिम समुदायों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई) को धर्म के आधार पर नागरिकता प्रदान करता है, जिन्होंने 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश किया था, लेकिन सीएए कानून में एक बड़ा पेंच नजर आ रहा है। इसके तहत नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत विदेशी आवेदकों को अपने मूल देश की नागरिकता को छोड़ना आवश्यक नहीं है, जिससे उनके पास दोहरी नागरिकता यानी डुअल सिटिजनशिप का विकल्प बन सकता है, जो सीधे-सीधे नागरिकता अधिनियम-1955 का उल्लंघन है

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने एक याचिका दायर कर मांग की है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019 और नागरिकता संशोधन नियम 2024 पर रोक लगाई जाए। मुस्लिम लीग का कहना है कि 1955 के नागरिकता अधिनियम की धारा 9 और संविधान के अनुच्छेद 9 दोनों स्पष्ट करते हैं कि देश में दोहरी नागरिकता किसी भी तरह से मान्य नहीं है। 


सीएए कानून धर्म के आधार पर देता है नागरिकता
लोकसभा सचिवालय के पूर्व महासचिव और संविधान विशेषज्ञ पीडीटी आचारी कहते हैं कि सीएए लाने का जो उद्देश्य रहा है, वह है अफगानिस्तान, बांग्लादेश या पाकिस्तान में सताए हुए अवैध प्रवासी अल्पसंख्यक हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को तेजी से भारतीय नागरिकता प्रदान करना है, जो 31 दिसंबर, 2014 या उससे पहले भारत में प्रवेश कर चुके हों। 

वह कहते हैं कि सीएए कानून धर्म के आधार पर नागरिकता देता है। इसमें कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाता है क्योंकि जो लोग शरणार्थी बन कर आते हैं कि उनके पास कोई रिकॉर्ड नहीं होता है। अगर उनसे कहा जाए कि आपको नागरिकता तब मिलेगी जब आप तहसीलदार का प्रमाण पत्र लेकर आएंगे, तो यह उनके संभव नहीं है, क्योंकि वे पहले से ही सताए हुए लोग होते हैं, जो भाग कर सीमा पार कर भारत आ गए हैं। ऐसे ही लोगों को कानून में अवैध प्रवासी कहा गया है। 

भारत में शरण लेने के लिए नहीं है कारण बताने की जरूरत
वहीं सीएए के तहत नागरिकता लेने के लिए ऑनलाइन तरीके से आवेदन करना होता है। सीएए कानून के तहत एक मंदिर का पुजारी भी आवेदक को नागरिकता के आवेदन के लिए प्रमाणपत्र जारी कर सकता है। जिसे वेबसाइट पर अपलोड किया जाता है। नियम के तहत कोई भी संस्थान, जिस पर लोगों का भरोसा हो, उसके पास प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार है। नागरिकता देने का अंतिम निर्णय अधिकार प्राप्त समिति द्वारा लिया जाएगा, स्थानीय संस्था केवल यह सिफारिश कर सकती है कि वे एक विशेष धर्म से संबंधित हैं। इसके लिए केवल एक कागज की खाली शीट पर या 10 रुपये के स्टांप पेपर पर प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता है। वहीं सीएए नियम, 2024 के तहत यह साबित करने या जांचने का कोई तरीका मौजूद नहीं है कि क्या आवेदक को उत्पीड़न या उत्पीड़न के डर के कारण भारत में प्रवेश करना पड़ा। नियमों के अनुसार आवेदन पत्र में आवेदक को उन हालात का ब्योरा देने की आवश्यकता नहीं है, जिनके कारण उन्होंने भारत में शरण मांगी। वे ऐसी किसी भी घोषणा करने के लिए बाध्य नहीं हैं। 

देश में दोहरी नागरिकता मान्य नहीं
यह पूछे जाने पर कि अगर कोई शरणार्थी भारत आकर यहां की नागरिकता ले लेता है, तो उसकी पुरानी नागरिकता का क्या होगा? इस पर पीडीटी आचारी कहते हैं कि जो अवैध प्रवासी अल्पसंख्यक हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोग भारत में शरण ले रहे हैं, ऐसे लोग बहुत गरीब हैं, जो जान बचा कर यहां आए हैं। अगर उनमें से किसी के पास पहले देश की नागरिकता होती भी है, तो जैसे ही वह यहां का नागरिक बनेगा, भारतीय कानून के तहत उसकी पहले देश की नागरिकता स्वत: ही खत्म हो जाएगी, वह दस्तावेज रद्दी का टुकड़ा बन जाएगा। हमारे देश में दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है। वह आगे कहते हैं कि नागरिकता अधिनियम, 1955 में डुअल सिटिजनशिप का कोई कांसेप्ट नहीं है, इसलिए सीएए में इसे लेकर अलग से कुछ नहीं कहा गया है। 

क्या है दोहरी नागरिकता?
दोहरी नागरिकता को इस तरह से समझा जा सकता है कि किसी शख्स के पास दो अलग-अलग देशों की नागरिकता हो। हमारा संविधान दोहरी नागरिकता की इजाजत नहीं देता है। नियमों के तहत अगर किसी भारतीय ने किसी अन्य देश की नागरिकता हासिल कर ली है, तो उसकी भारतीय नागरिकता उसी वक्त खत्म हो जाती है। वहीं अगर किसी विदेशी को भारतीय नागरिकता लेनी है, तो उसे अपने मूल देश की नागरिकता छोड़नी होगी। लेकिन साल 2005 से भारत में ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया (OCI) स्टेटस देने की शुरुआत की थी, जो भारतीयों को दोहरी नागरिकता से जुड़े कई फायदे देती है। 

क्या है ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया स्टेटस?
ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया स्टेटस भारतीय मूल के ऐसे लोगों को दिया जाता है, जो भारत से पलायन कर गए थे और उन्होंने पाकिस्तान एवं बांग्लादेश को छोड़कर किसी अन्य देश की नागरिकता ले ली थी। ऐसे में अगर उनका देश दोहरी नागरिकता की इजाजत देता है, तो वह भारत में OCI स्टेटस के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके तहत ओसीआई स्टेट्स वाले शख्स को भारत में मल्टीपल एंट्री की छूट और जीवनभर के लिए मल्टी-पर्पज वीजा मिलता है। वहीं उसे भारत में लंबे प्रवास के बारे में स्थानीय पुलिस को सूचना देने की जरूरत नहीं है। एनआरआई की तरह उसे भारत में फाइनेंशियल, इकॉनमिक और एजुकेशनल फील्ड में समान अधिकार ओसीआई को मिलते हैं, लेकिन वह किसी कृषि या बागान भूमि या संपत्ति का अधिग्रहण नहीं कर सकता है। इसके अलावा ओसीआई का दर्जा पाने वाला शख्स न तो देश में होने वाले किसी भी तरह के चुनाव में वोट डालने का अधिकार रखता है, और न ही वह लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद का सदस्य चुना जा सकता है। इसके अलावा वह भारत में किसी भी तरह के संविधानिक पद जैसे राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जज नहीं बन सकता है। 

दोहरी नागरिकता पर विदेश मंत्री ने कही थी ये बात
05 फरवरी, 2020 को राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में गृह मंत्रालय ने कहा था कि नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9 के तहत भारतीय संविधान अनुच्छेद 9 के प्रावधानों के तहत दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं दी जा सकती है। वहीं पिछले साल 23 दिसंबर 2023 को विदेश मंत्री एस. जयशंकर से दोहरी नागरिकता देने की संभावना को लेकर सवाल किया गया था। जवाब में विदेश मंत्री ने कहा था कि दोहरी नागरिकता देने को लेकर सुरक्षा से जुड़ीं चुनौतियां हैं, आर्थिक चुनौतियां हैं। ये भी चुनौती है कि आखिर किन देशों में रहने वाले भारतीयों को दोहरी नागरिकता दी जानी चाहिए। हालांकि जयशंकर ने दोहरी नागरिकता को लेकर कोई आश्वासन भी नहीं दिया और न ही इसे पूरी तरह खारिज किया था। हालांकि, अमेरिका, जर्मनी, कनाडा, रूस जैसे कई देशों में दोहरी नागरिकता की इजाजत है। 

ये अल्पसंख्यक हैं बाहर
वहीं विशेषज्ञ कहते हैं कि सीएए के तहत केवल पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अवैध प्रवासी अल्पसंख्यक हिंदू, ईसाई, पारसी, सिख और जैन ही सीएए के तहत लाभ के पात्र हैं। लेकिन पाकिस्तान में सबसे ज्यादा सताए जाने वाले अहमदिया समुदाय को लेकर इसमें कुछ नहीं कहा गया है। वहीं इसमें वे लोग भी बाहर हैं, जो किसी भी धर्म को नहीं मानते हैं। इसके अलावा श्रीलंका में तमिल हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के बाद भी उन्हें इससे बाहर रखा गया है। वहीं चीन से डर भारत आने वाले बौद्धों और उन यहूदियों को शामिल नहीं किया गया, जिन्होंने दशकों से भेदभाव का अनुभव किया है।

Post a Comment

Previous Post Next Post