सार
मथुरा को एक ऐसे सांसद भी मिले जिन्हें ये तक नहीं पता था मथुरा कहां है। वे जीतने के बाद कभी भी मथुरा नहीं आए। उनके बारे में एक किस्सा ये भी मशहूर है कि उन्होंने सिर्फ नमस्ते करने के लिए इंदिरा गांधी का काफिला रुकवा दिया था।
विस्तार
ब्रज की जनता लोकसभा में बाहरी प्रत्याशियों के सिर जीत का सेहरा बांधने के लिए जानी जाती है। 1977 के चुनाव में भारतीय लोकदल की टिकट पर मथुरा से चुनाव लड़कर जीत हासिल करते हुए मनीराम बागड़ी भी इन्हीं में से एक थे। मनीराम बागड़ी के विषय में यह भी किस्सा मशहूर है कि वह जीत के बाद कभी मथुरा नहीं आए। एक बार मथुरा के लोग उनसे मिलने दिल्ली गए तो मनीराम बागड़ी बोले कि मथुरा कहां पर है। यह बात सुनते ही वह लोग वापस लौट आए थे।