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UP: मथुरा को एक ऐसे सांसद भी मिले जो जीतने के बाद कभी न आए...इंदिरा गांधी का भी रुकवा दिया था काफिला

 सार

मथुरा को एक ऐसे सांसद भी मिले जिन्हें ये तक नहीं पता था मथुरा कहां है। वे जीतने के बाद कभी भी मथुरा नहीं आए। उनके  बारे में एक किस्सा ये भी मशहूर है कि उन्होंने सिर्फ नमस्ते करने के लिए इंदिरा गांधी का काफिला रुकवा दिया था।




विस्तार

ब्रज की जनता लोकसभा में बाहरी प्रत्याशियों के सिर जीत का सेहरा बांधने के लिए जानी जाती है। 1977 के चुनाव में भारतीय लोकदल की टिकट पर मथुरा से चुनाव लड़कर जीत हासिल करते हुए मनीराम बागड़ी भी इन्हीं में से एक थे। मनीराम बागड़ी के विषय में यह भी किस्सा मशहूर है कि वह जीत के बाद कभी मथुरा नहीं आए। एक बार मथुरा के लोग उनसे मिलने दिल्ली गए तो मनीराम बागड़ी बोले कि मथुरा कहां पर है। यह बात सुनते ही वह लोग वापस लौट आए थे।
25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक का 21 महीने की अवधि में भारत में आपातकाल घोषित था। इस इमरजेंसी के बाद भारत में लोकसभा के चुनाव हुए। कांग्रेस के खिलाफ लोगों में आक्रोश था। समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, मुलायम सिंह, चौधरी चरण सिंह की लहर थी। भारतीय लोकदल ने हरियाणा के हिसार के रहने वाले मनीराम बागड़ी को मथुरा लोकसभा सीट पर उतारा गया। वह कांग्रेस के खिलाफ जनता के भारी विरोध के कारण 2,96,518 वोट पाकर कांग्रेस के प्रत्याशी रामहेत सिंह को 2,15,265 वोटों से हरा दिया।



 

जीत के बाद वह कभी मथुरा नहीं आए। पुराने राजनीतिक जानकार बताते हैं कि कुछ समय बाद मथुरा के लोग उनसे स्थानीय समस्याओं को लेकर मुलाकात करने दिल्ली गए। वहां मनीराम बागड़ी से जब कहा कि वह मथुरा से आए हैं। इस पर मनीराम बागड़ी ने उलटा सवाल कर दिया था कि यह मथुरा कहां पर है।

 

देश के पहले सांसद, जिन्हें लोकसभा से किया था निलंबित
मनीराम बागड़ी हरियाणा के बड़े नेता कहे जाते थे। वह देश के पहले सांसद भी थे, जिन्हें लोकसभा से निलंबित किया गया था। 24 मई 1962 को हिसार लोकसभा से चुनकर लोकसभा पहुंचे। उन्होंने संसद में बिना एजेंडे के किसी मुद्दे पर बोलना शुरू कर दिया था। इस पर तत्कालीन स्पीकर हुकम सिंह ने रोका मगर बागड़ी रुके नहीं। नाराज स्पीकर ने उनको एक हफ्ते के लिए लोकसभा से सस्पेंड कर दिया था।

 

इंदिरा ने काफिला रोककर की थी नमस्ते
मनीराम बागड़ी के विषय में यह भी किस्सा मशहूर है कि मनीराम बागड़ी बेटे सुभाष बागड़ी के साथ दिल्ली के अपने सरकारी आवास तीन मूर्ति लेन से पैदल ही दूध लेने जा रहे थे। सामने से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का काफिला आ रहा था। पीएम इंदिरा गांधी ने काफिले को रुकवाया और गाड़ी का शीशा नीचे किया। इंदिरा गांधी ने मुस्कुरा कर हाथ जोड़े और मनीराम बागड़ी को नमस्ते की।

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