सार
Kargil War 1999: कारगिल को हमारी तीनों सेनाओं ने कैसे जीता? थल सेना का विजय ऑपरेशन क्या था? वायु सेना का ऑपरेशन सफेद सागर क्या था? नौसेना का ऑपरेशन तलवार क्या था? कैसे एक याक ने पाकिस्तानी साजिश का खुलासा किया? आइये जानते हैं…
विस्तार
यहां तक कि प्रधानमंत्री वाजपेयी को 21 तोपों की सलामी तक दी गई। लेकिन, ये सब पाकिस्तान अपने नापाक मंसूबो पर पर्दा डालने के लिए कर रहा था। एक ओर वह भारत की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा था, तो दूसरी तरफ उसकी सेना हिन्दुस्तान पर हमले की साजिश रच रही थी।
पाकिस्तानी सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ इस साजिश के सूत्रधार थे। साजिश का नाम था 'ऑपरेशन बद्र'। सेना प्रमुख के साथ पाकिस्तान सेना के बड़े अफसरों ने मिलकर इस प्लान को बनाया था। प्लान था शिमला समझौते को तोड़ने का, जिससे मुशर्रफ के नापाक मंसूबे पूरे हो सकें।
दरअसल, शिमला समझौता के बाद ये तय हुआ कि कारगिल जहां सर्दियों में तापमान -30 से -40 डिग्री चला जाता है, इसलिए दोनों देशों की सेनाएं अक्तूबर के पास अपनी-अपनी पोस्ट छोड़कर वापस आ जाती थीं। इसके बाद मई-जून में दोबारा अपने-अपने पोस्ट पर जाती थीं। ‘ऑपरेशन बद्र’ में रची गई साजिश के तहत 1998 की सर्दियों में जब भारतीय सेनाएं वापस लौटीं, तब पाकिस्तानी सेना ने अपनी पोस्ट नहीं छोड़ी इसके साथ ही घुसपैठिए भारतीय पोस्ट पर कब्जा करके बैठ गए। मुशर्रफ का प्लान था कि उनकी सेना लेह-श्रीनगर हाईवे पर कब्जा कर लेगी। जिससे सियाचिन पर पाकिस्तान कब्जा कर सके।