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Bengal Panchayat Election: बंगाल पंचायत चुनाव के नतीजे क्या इशारा कर रहे, किसी पार्टी के लिए कैसे रहे नतीजे?

 सार

पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के नतीजे क्या कहते हैं? इन नतीजों का सत्ताधारी टीएमसी के लिए क्या मायने है? भाजपा के लिए यह नतीजे क्या संदेश देते हैं? आइये जानते हैं



विस्तार

पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के नतीजे लगभग साफ हो चुके हैं। राज्य में कुल 63,229 ग्राम पंचायत सीटें हैं। इनमें 42 हजार से ज्यादा सीटों पर टीएमसी जीत चुकी है। बीजेपी दूसरे नंबर पर है और उसने 9,223 सीटों पर जीत हासिल की है

जिला परिषद की 928 सीटों में से टीएमसी को 764 सीटों पर जीत मिली है। भाजपा 25 सीटों पर जीत हासिल कर चुकी है। पंचायत समिति के नतीजों पर नजर डालें तो कुल 9,730 में से 5,898 सीटों पर टीएमसी या तो जीत हासिल कर चुकी है या फिर आगे है। भाजपा को अबतक 706 सीटों पर जीत हासिल हुई है।


ये नतीजे क्या कहते हैं? इन नतीजों का सत्ताधारी टीएमसी के लिए क्या मायने है? भाजपा के लिए यह नतीजे क्या संदेश देते हैं? आइये जानते हैं..

 

पहले जानिए अब तक के चुनाव नतीजे

बंगाल ग्राम पंचायत चुनाव परिणाम 2023
ग्राम पंचायत में कुल सीटें- 63,229
पार्टी आगे/जीते (59,627 सीटों का रुझान)
टीएमसी42,097
बीजेपी9,223
सीपीएम+ 3,021
कांग्रेस2,420
अन्य 2,866

बंगाल पंचायत समिति चुनाव परिणाम 2023
पंचायत समिति की कुल सीटें - 9,730

 
पार्टीआगे/जीते (7,154 सीटों का रुझान)
टीएमसी5,898
बीजेपी706
सीपीएम+142
कांग्रेस 143
अन्य265

बंगाल जिला परिषद चुनाव परिणाम 2023
जिला परिषद की कुल सीटें - 928
पार्टीआगे/जीते (806 सीटों के रुझान)
टीएमसी764
बीजेपी 25
सीपीएम+04
कांग्रेस12
अन्य 01

(नोट: ये आंकड़े बुधवार की सुबह 11 बजे तक के हैं। अंतिम नतीजे आने बाकी हैं।)
 

ममता की पार्टी के लिए नतीजों का क्या मतलब?
इसे समझने के लिए हमने 2013 और फिर 2018 में हुए पंचायत चुनाव के नतीजों का विश्लेषण किया। 2013 में मुख्य लड़ाई टीएमसी बनाम सीपीआई थी। तब टीएमसी ने पंचायत चुनाव में 80 फीसदी से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की थी। 2018 में टीएमसी की जीत का ये आंकड़ा बढ़कर 90 प्रतिशत से ज्यादा हो गया। 2018 में ग्राम पंचायत की 48649 में से 38118 सीटों पर टीएमसी ने कब्जा कर लिया था। मतलब ग्राम पंचायत की 78.35 फीसदी से ज्यादा सीटों पर टीएमसी उम्मीदवार चुनाव जीते थे। भाजपा के हिस्से 5779 (11.87%) , सीपीएम के 1713 और कांग्रेस के 1066 सीटें आईं थीं। 1960 सीटों पर अन्य उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी। 
 

पंचायत समिति में कौन बढ़ा कौन घटा?
इसी तरह पंचायत समिति की  9,217 सीटों में से  8,062 (87.46%) पर टीएमसी, 769 सीटों (8.34%) पर भाजपा, 129 सीटों पर सीपीएम और 133 सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों की जीत हुई थी। 121 सीटों पर अन्य प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी। वहीं, जिला परिषद की 825 में 793 यानी 96.12% सीटों पर टीएमसी की जीत हुई थी। 22 सीटों (2.66%) पर भाजपा, सीपीएम के खाते में सिर्फ एक सीट गई थी। कांग्रेस के छह उम्मीदवार चुनाव जीते थे। 

पंचायत समिति की बात करें तो कुल 9,730  में से टीएमसी के खाते में 5898 सीटें (60.61%) आ चुकी हैं। पिछली बार के मुकाबले टीएमसी को करीब बीस फीसदी का सीटों का नुकसान हुआ है। वहीं इस बार भाजपा के खाते में 706 सीटें आईं हैं। इसमें भाजपा को करीब एक प्रतिशत सीटों का नुकसान उठाना पड़ा है। इस बार सीपीएम और कांग्रेस को इसमें अच्छी बढ़त मिली है। वहीं, निर्दलीय और छोटे दलों के प्रत्याशियों का भी पंचायत समिति के चुनाव में दबदबा देखने को मिला है।  
 

ग्राम पंचायतों में भी घट गईं टीएमसी की सीटें
इस बार ग्राम पंचायत की कुल सीटें 63,229 हैं। इनमें 42,097 सीटों पर टीएमसी की जीत हुई है। मतलब 66.57 फीसदी सीटों पर ही टीएमसी को जीत मिली है। 2018 के मुकाबले इसमें करीब 12 प्रतिशत की गिरावट हुई है। वहीं, भाजपा ने 9223 सीटों (14.58%) पर विजय हासिल की। 2018 से तुलना करें तो भाजपा को इस बार करीब तीन फीसदी सीटों का फायदा हुआ है। इसके अलावा सीपीएम+ के खाते में 3021, कांग्रेस के खाते में 2420 सीटें जा चुकी हैं। अब तक 2866 निर्दलीय व अन्य छोटे दलों के प्रत्याशी भी जीत चुके हैं। 
 

जिला परिषद में भाजपा की सीटों में मामूली इजाफा
बंगाल जिला परिषद चुनाव की बात करें तो 928 में से 764 सीटों पर टीएमसी को जीत मिली है। मतलब परिषद की 82.32 प्रतिशत सीटों पर अकेले टीएमसी का कब्जा है। पिछली बार जिला परिषद की 96.12 प्रतिशत सीटें टीएमसी के खाते में गईं थीं। मतलब इसमें भी टीएमसी को नुकसान उठाना पड़ा है। 

भाजपा ने पिछली बार 2.66 प्रतिशत सीटों पर जीत हासिल की थी। इस बार 2.69% सीटों पर पार्टी ने कब्जा जमाया। मतलब पिछली बार के मुकाबले भाजपा को मामूली बढ़त मिली है। वहीं, इस बार चार पर सीपीएम+, 12 पर कांग्रेस को जीत मिली है। एक सीट अन्य के खाते में गई है। बड़ी जीत के बावजूद टीएमसी की सीटें घटी हैं। ममता की पार्टी के लिए यह चिंता का सबब है। वहीं, भाजपा सीटों में हुए इजाफे को 2024 के लिए एक बेहतर नतीजे के तौर पर देख रही है

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