सार
खरगे ने कहा कि मणिपुर पर नियम 267 के तहत चर्चा होनी चाहिए। मैंने अपने नोटिस में ये बताया है कि नियम 267 के तहत चर्चा क्यों होनी चाहिए। उन्होंने धनखड़ से पूछा कि आप बार-बार प्रधानमंत्री का बचाव क्यों कर रहे हैं। इस पर सभापति ने करारा जवाब दिया।
विस्तार
संसद के मानसून सत्र में हंगामा जारी रहा। राज्यसभा में एक बार फिर मणिपुर मामले को लेकर गहमागहमी दिखाई दी। विपक्ष लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को घेरने में लगी हुई है। इस बीच गुरुवार को राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के बीच तीखी बहस हुई। वहीं, ठहाके भी लगते दिखे।
खरगे ने सभापति को बताया नाराज
दरअसल, खरगे ने कहा कि मणिपुर पर नियम 267 के तहत चर्चा होनी चाहिए। मैंने अपने नोटिस में 8 पॉइंट में ये बताया है कि नियम 267 के तहत चर्चा क्यों होनी चाहिए। हमारा सुझाव है कि आप हमें अपने चेंबर में बुलाइए और 1 बजे तक सदन को स्थगित कीजिए। इस मसले पर समाधान होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कल मैंने आपसे अनुरोध किया था, लेकिन आप शायद नाराज थे।
सभापति बोले मैं 45 साल से…
सभापति हंसे और उन्होंने कहा कि मैं 45 साल से अधिक समय से शादीशुदा आदमी हूँ। मैं कभी क्रोधित नहीं होता। उन्होंने इतना ही कहते ही सदन में ठहाके लगने शुरू हो गए। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस नेता पी.चिदंबरम का जिक्र किया और कहा कि चिदंबरम एक प्रख्यात वरिष्ठ वकील हैं। वह जानते हैं कि एक वरिष्ठ वकील के रूप में हमें गुस्सा करने का कोई अधिकार नहीं है, कम से कम प्राधिकार के समक्ष तथा आप (नेता प्रतिपक्ष खरगे) एक प्राधिकार हैं। मैं कभी गुस्सा नहीं करता। सभापति ने खरगे से कहा कि वह अपनी बात में सुधार कर लें। इस पर खरगे ने कहा कि आप इसे दिखाते नहीं हैं, लेकिन आप अंदर से गुस्से में हैं। खरगे की इस बात पर न केवल सभी सदस्य बल्कि सभापति धनखड़ भी खिलखिला कर हंसने लगे।
दरअसल, खरगे ने कहा कि मणिपुर पर नियम 267 के तहत चर्चा होनी चाहिए। मैंने अपने नोटिस में 8 पॉइंट में ये बताया है कि नियम 267 के तहत चर्चा क्यों होनी चाहिए। हमारा सुझाव है कि आप हमें अपने चेंबर में बुलाइए और 1 बजे तक सदन को स्थगित कीजिए। इस मसले पर समाधान होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कल मैंने आपसे अनुरोध किया था, लेकिन आप शायद नाराज थे।
सभापति बोले मैं 45 साल से…
सभापति हंसे और उन्होंने कहा कि मैं 45 साल से अधिक समय से शादीशुदा आदमी हूँ। मैं कभी क्रोधित नहीं होता। उन्होंने इतना ही कहते ही सदन में ठहाके लगने शुरू हो गए। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस नेता पी.चिदंबरम का जिक्र किया और कहा कि चिदंबरम एक प्रख्यात वरिष्ठ वकील हैं। वह जानते हैं कि एक वरिष्ठ वकील के रूप में हमें गुस्सा करने का कोई अधिकार नहीं है, कम से कम प्राधिकार के समक्ष तथा आप (नेता प्रतिपक्ष खरगे) एक प्राधिकार हैं। मैं कभी गुस्सा नहीं करता। सभापति ने खरगे से कहा कि वह अपनी बात में सुधार कर लें। इस पर खरगे ने कहा कि आप इसे दिखाते नहीं हैं, लेकिन आप अंदर से गुस्से में हैं। खरगे की इस बात पर न केवल सभी सदस्य बल्कि सभापति धनखड़ भी खिलखिला कर हंसने लगे।
