https://www.youtube.com/c/AIBSNews24

Jharkhand: कभी किसी दल को बहुमत नहीं, 24 साल में 13 सरकार; सात चेहरों के इर्द-गिर्द घूमती रही झारखंड की सत्ता

 सार

Jharkhand: झारखंड में दो चरण में 13 और 20 नवंबर को विधानसभा चुनाव हैं। राज्य में अभी झामुमो के नेतृत्व वाले महागठबंधन की सरकार है, जिसके मुखिया हेमंत सोरेन हैं।2000 में झारखंड के गठन के बाद सात चेहरे राज्य की कमान संभाल चुके हैं। आइये जानते हैं झारखंड में बीते विधानसभा चुनावों का हाल कैसा रहा है..




विस्तार

झारखंड में दो चरण में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। 13 और 20 नवंबर को झारखंड के मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। नतीजे 23 नवंबर को आएंगे। तमाम पार्टियां चुनावी परीक्षा में जाने से पहले अपने चेहरों को चुनने के लिए मंथन कर रही हैं। दिल्ली से लेकर झारखंड तक बैठकों को दौर जारी है। फिलहाल, एनडीए के दल भाजपा और आजसू तो दूसरी ओर कांग्रेस ने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है।

2019 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की राजनीति में बहुत कुछ बदल चुका है। झारखंड ने बीते पांच साल में दो व्यक्तियों को तीन बार मुख्यमंत्री बनते देखा है। साल 2000 में झारखंड के गठन के बाद यहां भाजपा या झामुमो के नेतृत्व में ज्यादातर सरकारें बनी हैं। 24 साल में 13 अलग-अलग सरकारें बन चुकी हैं। इन सरकारों का नेतृत्व सात अलग-अलग व्यक्तियों ने किया है।

झारखंड में बीते विधानसभा चुनावों का हाल कैसा रहा है? कब किस दल या गठबंधन को बहुमत मिला? इस दौरान किस दल के खाते में कितने प्रतिशत वोट आए? पिछले चुनाव में क्या हुआ था? 2019 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की राजनीति में कितनी बदली?

पहले जानते हैं कि झारखंड में पहली सरकार कैसे बनी थी?
लंबे समय तक बिहार का हिस्सा रहा झारखंड 15 नवंबर 2000 को भारत का 28वां राज्य बना। साल 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान संसद ने बिहार पुनर्गठन अधिनियम के जरिए झारखंड का निर्माण किया था। उस वर्ष की शुरुआत में बिहार में हुए चुनाव के आधार पर झारखंड की पहली विधानसभा के गठन का आधार बना। इन चुनावों के आधार पर भाजपा ने सहयोगियों के साथ मिलकर राज्य में पहली सरकार बनाई। 15 नवंबर 2000 को बाबूलाल मरांडी ने राज्य के पहले मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
मुख्यमंत्री बनने से पहले मरांडी दूसरी और तीसरी वाजपेयी सरकार में पर्यावरण और वन राज्य मंत्री रह चुके थे। उन्होंने लोकसभा से इस्तीफा दिया और मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए विधानसभा उपचुनाव जीता। मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल ढाई साल तक चला। मरांडी की जगह उनके मंत्रिमंडल में भाजपा के एक मंत्री अर्जुन मुंडा आए, जो झारखंड के दूसरे मुख्यमंत्री बने। मुंडा 2005 में पहली विधानसभा के कार्यकाल के अंत तक मुख्यमंत्री बने रहे। अर्जुन मुंडा तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। 

झारखंड के पहले विधानसभा चुनाव में क्या हुआ था?
81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा के लिए 2005 में राज्य में पहली बार चुनाव हुए। जब नतीजे सामने आए तो सत्ताधारी भाजपा और उसका गठबंधन 41 सीटों के जादुई आंकड़ों से पिछड़ गया। भारतीय जनता पार्टी को 23.57% मत के साथ सबसे ज्यादा 30 सीटें आईं। इसके बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा को 17 सीटें और 14.29% मत हासिल किए। नौ सीटें जीतकर कांग्रेस तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी और उसे 12.05% वोट मिले। अन्य दलों की बात करें तो राष्ट्रीय जनता दल के सात, जदयू के छह और आजसू के दो उम्मीदवार जीते। इसके अलावा निर्दलीय और अन्य दलों के कुल 10 उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहे। 

इस तरह से झारखंड की जनता ने किसी एक राजनीतिक दल को सरकार बनाने का जनादेश नहीं दिया। झामुमो के नेता शिबू सोरेन ने सरकार बनाने का दावा पेश किया, लेकिन आवश्यक संख्या नहीं जुटा सके। इसलिए सीएम के रूप में शपथ लेने के 10 दिन के भीतर उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद अर्जुन मुंडा ने भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार का नेतृत्व किया और मार्च 2005 में दूसरी बार सीएम बने।

राजनीतिक अनिश्चितता के चलते बदले कई सीएम
हालांकि, अर्जुन मुंडा के नेतृत्व वाली सरकार केवल डेढ़ साल तक ही चल पाई। गठबंधन के टूटने के कारण सितंबर 2006 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। उसके बाद जेएमएम के समर्थन वाली एक और गठबंधन सरकार ने राज्य की सत्ता संभाली। झारखंड में पहली बार सरकार का नेतृत्व एक निर्दलीय विधायक मधु कोड़ा ने किया। कोड़ा जब सीएम बने तब उनकी उम्र करीब 35 साल थी। कोड़ा सरकार को झामुमो और अन्य दलों का समर्थन हासिल था। करीब दो साल बाद झामुमो ने समर्थन वापस ले लिया और मधु कोड़ा की सरकार गिर गई। इसके बाद झामुमो के नेता शिबू सोरेन अगस्त 2008 में दूसरी बार सीएम बने। सोरेन जब सीएम बने, तो वे लोकसभा सांसद थे। सीएम बने रहने के लिए शिबू सोरेन को उपचुनाव लड़ना पड़ा। जनवरी 2009 में सोरेन उपचुनाव हार गए, जिसके चलते उन्हें सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा और राजनीतिक अनिश्चितता के कारण राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। दिसंबर 2009 तक राज्य में राष्ट्रपति शासन जारी रहा, जब झारखंड में दूसरी बार चुनाव हुए। 

दूसरे चुनाव के बाद भी कई बार सरकारें बनीं और गिरीं
2009 में राज्य में दूसरी बार विधानसभा चुनाव हुए। जब नतीजे सामने आए तो कोई भी दल 41 सीटों के जादुई आंकड़े को नहीं छू पाया। भारतीय जनता पार्टी को सबसे ज्यादा 20.18% मत के साथ 18 सीटें आईं। झारखंड मुक्ति मोर्चा को भी 18 सीटें मिलीं लेकिन इसने 15.20% मत हासिल किए। 14 सीटें जीतकर कांग्रेस तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी और उसे 16.16% वोट मिले। बाबूलाल मरांडी की झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) के 11 विधायक चुनकर आए और इसे 8.99% मत मिले।

अन्य दलों की बात करें तो राजद और आजसू के पांच-पांच और जदयू के दो उम्मीदवार जीते। इसके अलावा निर्दलीय और अन्य दलों के कुल आठ प्रत्याशी चुनाव जीते। 

खंडित जनादेश के कुछ महीनों बाद झामुमो, भाजपा ने अन्य दलों के साथ मिलकर गठबंधन की सरकार बनाई, जिसका नेतृत्व शिबू सोरेन ने किया। सोरेन का तीसरा कार्यकाल करीब पांच महीने (दिसंबर 2009-मई 2010) तक चला और भाजपा ने सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया। 

कुछ समय तक राष्ट्रपति शासन रहने के बाद सितंबर 2010 में भाजपा के अर्जुन मुंडा तीसरी बार सीएम बने। लेकिन अर्जुन मुंडा सरकार का तीसरा कार्यकाल जनवरी 2013 में ही समाप्त हो गया। राष्ट्रपति शासन हटने के बाद शिबू सोरेन के बेटे हेमंत सोरेन सीएम बने। झामुमो-कांग्रेस गठबंधन के नेतृत्व वाली सरकार डेढ़ साल तक चली।

पहली बार किसी सरकार ने कार्यकाल पूरा किया
2014 के नवंबर में राज्य में तीसरी बार विधानसभा चुनाव हुए। 81 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने सबसे अधिक 37 सीटें जीतीं जिसने 31.26% वोट हासिल किए। इसके बाद झामुमो को 17 सीटें मिलीं इसके खाते में 20.43% मत गए। आठ विधायकों के साथ झाविमो (प्रजातांत्रिक) तीसरे स्थान पर रही जिसके पास 9.99% वोट गए। कांग्रेस के 10.46% वोट के साथ छह विधायक तो आजसू के 3.68% वोट के साथ पांच विधायक जीते। इसके अलावा छह अन्य विधायक भी चुनकर विधानसभा पहुंचे। 

भाजपा के वरिष्ठ नेता रघुबर दास ने दिसंबर 2014 में बतौर सीएम शपथ ली। उनकी सरकार ने राज्य के इतिहास में पहली बार पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा किया। 

पिछले चुनाव में क्या हुआ था?
झारखंड में पिछले विधानसभा चुनाव 30 नवंबर से 20 दिसंबर 2019 के बीच पांच चरणों में हुए थे। इसमें कुल 65.18 फीसदी मतदान दर्ज किया गया था। नतीजे 23 दिसंबर 2019 को घोषित किए गए। जब नतीजे सामने आए तो सत्ताधारी भाजपा को झटका लगा और वह 41 सीटों के जादुई आंकड़ों से पिछड़ गई। हेमंत सोरेन की पार्टी झामुमो को सबसे ज्यादा 30 सीटें आईं और इसे 18.72% वोट मिले। इसके बाद भाजपा को 25 सीटें मिलीं जिसने 33.37% मत हासिल किए। अन्य दलों की बात करें तो कांग्रेस के 16 विधायक (13.88% वोट), झाविमो के तीन (5.45% वोट) और आजसू के दो विधायक (8.1% वोट) जीते। इसके अलावा दो निर्दलीय विधायक जबकि राजद, भाकपा (माले) और एनसीपी के एक-एक विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे

राज्य में महागठबंधन की सरकार बनी
हार के बाद भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री रहे रघुबर दास ने इस्तीफा दे दिया। झामुमो के नेतृत्व में राज्य में महागठबंधन की सरकार बनी। इस सरकार में झामुमो को कांग्रेस, राजद, सीपीआई (एमएल) और एनसीपी का साथ मिला। इसके अलावा झाविमो प्रमुख और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी हेमंत सोरेन सरकार को अपनी पार्टी का समर्थन दे दिया। इसके बाद 29 दिसंबर को झामुमो विधायक दल के नेता हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

पिछले चुनाव के बाद राज्य में क्या-क्या हुआ?
फरवरी 2020 में झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी 'घर वापसी' करते हुए भाजपा में शामिल हो गए। इसके अलावा उन्होंने अपनी पार्टी झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) का भाजपा में विलय भी कर दिया।  

वहीं हेमंत सोरेन का दूसरा कार्यकाल काफी चुनौतियों वाला रहा। 2022 में चुनाव आयोग ने झारखंड के तब के राज्यपाल रमेश बैस को एक याचिका पर अपनी राय भेजी थी जिसमें मांग की गई कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को खुद को एक खनन पट्टा देकर चुनावी कानून का उल्लंघन करने के लिए विधायक के रूप में अयोग्य ठहराया जाए। हालांकि, इस याचिका पर बाद में कोई कार्रवाई नहीं हुई।

हेमंत की मुश्किलें यहीं कम नहीं हुईं। 31 जनवरी 2024 को भूमि घोटाले के आरोपों के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी से ऐन पहले उन्होंने पद से त्यागपत्र दिया और राज्य की कमान शिबू सोरेन के करीबी माने जाने वाले चंपई सोरेन को मिली। 2 फरवरी 2024 को उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। पांच महीने से रांची की जेल में बंद हेमंत को 28 जून को बड़ी राहत मिल गई। झारखंड उच्च न्यायालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जमानत दे दी। इसके बाद झारखंड में नेतृत्व परिवर्तन हुआ और अदालत से राहत मिलने के बाद हेमंत ने चंपई की जगह ली। 4 जुलाई को हेमंत तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बन गए। 

हालांकि, हेमंत सोरेन के झारखंड की सत्ता संभालने के बाद ही पूर्व मुख्यमंत्री चंपई के पाला बदलने की पटकथा शुरू हो गई। अगस्त मध्य में झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता चंपई सोरेन ने भाजपा नेताओं से मुलाकात की। चंपई ने 18 अगस्त को एक लंबा सोशल मीडिया पोस्ट लिखा जिससे तय हो गया कि वह झामुमो से अलग होंगे। चंपई ने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए पार्टी नेतृत्व पर खुद को अपमानित करने का आरोप लगाया। 26 अगस्त को चंपई नई दिल्ली पहुंचे जहां उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से फिर मुलाकात की। पूर्व सीएम चंपई सोरेन 30 अगस्त को रांची में आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। 

Post a Comment

Previous Post Next Post