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भारत-कनाडा: ट्रूडो के आरोपों को नकारने वाला फाइव आइज है क्या, यह निज्जर मामले की जांच को इच्छुक क्यों नहीं?

 सार

कनाडा-भारत विवाद के बीच फाइव आइज नामक एक खुफिया गठबंधन की भूमिका की चर्चा हो रही है। कनाडाई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि गठबंधन में शामिल एक देश ने कनाडा को कुछ इनपुट मुहैया कराए हैं। 




विस्तार

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में भारत और कनाडा के बीच तनाव जारी है। इस पूरे विवाद के बीच फाइव आइज नाम के खुफिया गठबंधन चर्चा में है। कनाडाई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि गठबंधन में शामिल एक देश ने कनाडा को कुछ इनपुट मुहैया कराए हैं। हालांकि, समूह ने साझा रूप से कनाडा के आरोपों की जांच करने में फिलहाल दिलचस्पी नहीं दिखाई है


सवाल उठता है कि भारत-कनाडा विवाद क्या है? फाइव आइज गठबंधन क्या है? यह करता क्या है? अभी यह क्यों चर्चा में है? आइये समझते हैं...

पहले जानते हैं भारत और कनाडा के बीच विवाद क्या है?
इस पूरे विवाद की जड़ में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामला है। दरअसल, निज्जर की 18 जून 2023 को कनाडा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसे कनाडा में ब्रिटिश कोलंबिया के सरी स्थित गुरुनानक सिख गुरुद्वारा के पास दो अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मार दी। निज्जर खालिस्तान टाइगर फोर्स का प्रमुख था और भारत में एक घोषित आतंकवादी था। 

इसी सोमवार यानी 18 सितंबर को निज्जर की हत्या को लेकर कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो ने वहां की संसद में भारत पर आरोप लगा दिए। ट्रूडो ने कहा कि कनाडाई सुरक्षा एजेंसियों के पास यह मानने के कारण है कि भारत सरकार के एजेंटों ने ही निज्जर की हत्या की। कनाडाई एजेंसियां निज्जर की हत्या में भारत की साजिश की संभावनाओं की जांच कर रही हैं। ट्रूडो ने कहा कि कनाडा की धरती पर कनाडाई नागरिक की हत्या में किसी भी प्रकार की संलिप्तता अस्वीकार्य है। 

वहीं, भारत के विदेश मंत्रालय ने 19 सितंबर को कनाडा के आरोपों का पहली प्रतिक्रिया दी। भारत ने ट्रूडो के दावों को बेतुका और पूर्वाग्रह से प्रेरित बताते हुए इन्हें सिरे से खारिज कर दिया। इसके साथ ही भारत ने कहा कि इस तरह के आरोप सिर्फ उन खालिस्तानी आतंकी और कट्टरपंथियों से ध्यान हटाने के लिए जिन्हें लंबे समय से कनाडा में शरण दी जा रही है।

...तो आरोपों के बीच फाइव आइज की चर्चा क्यों होने लगी?
भले ही कनाडा ने निज्जर की हत्या में भारत खुफिया एजेंटों के शामिल होने का आरोप लगाया लेकिन अब तक उसने कोई सबूत नहीं दिए हैं। इन सब के बीच अब कनाडा की कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि कनाडा ने कुछ भारतीय अधिकारियों की बातचीत को इंटरसेप्ट किया है और उसी के आधार पर उसने भारत पर आरोप लगाए हैं। इन रिपोर्ट्स में ये भी बताया गया है कि इस जासूसी के काम में फाइव आइज गठबंधन में शामिल एक देश ने कनाडा को कुछ इनपुट मुहैया कराए हैं। फाइव आइज गठबंधन में कनाडा के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। 

क्या करता है फाइव आइज समूह?
फाइव आइज देश आपस में खुफिया सूचनाओं को साझा करते हैं। यह समूह दूसरे विश्व युद्ध के बाद बना था। इसकी जड़ें मूल रूप से 1946 में अमेरिका और ब्रिटेन के बीच खुफिया संकेतों को साझा करने के लिए बनाए गए गठबंधन से जुड़ी हैं। 1949 में इसका पहला विस्तार हुआ जब कनाडा को शामिल किया गया। इसके बाद 1955 में बाकी दो सदस्य देश ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल किए गए थे। इसके साथ अन्य देश तृतीय पक्ष भागीदार में भी जुड़े हुए हैं। ये देश गठबंधन के साथ जानकारी तो साझा कर सकते हैं लेकिन औपचारिक भागीदार नहीं हैं।  

कैसे बदला काम करने का तरीका?
फाइव आइज संसाधनों को एकत्रित करती हैं और एक दूसरे के साथ खुफिया जानकारी साझा करती हैं। समय के साथ तकनीकी में बदलाव आया है, देशों के जानकारी एकत्र करने और साझा करने के तरीके में भी बदलाव आया है। जहां एक समय वे रेडियो सिग्नलों पर निर्भर थे, आज इसका ज्यादातर काम डिजिटल ट्रैकिंग और इंटरसेप्शन के माध्यम से किया जाता है।

सेंटर फॉर इंटरनेशनल गवर्नेंस इनोवेशन के सीनियर फेलो वार्क ने सीबीसी को बताया, 'फाइव आइज के पास बहुत सारी खुफिया क्षमताएं हैं जो कनाडा के पास नहीं हैं। विशेष रूप से यह अमेरिका के लिए है।' एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि कनाडा फाइव आइज गठबंधन से उस गठबंधन को भेजने की तुलना में अधिक जानकारी हासिल करता है। फाइव आइज में चार कनाडाई एजेंसियां शामिल हैं। 

ये देश किस तरह की जानकारी साझा करते हैं?
शुरुआत में समूह को अन्य देशों पर खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के लिए बनाया गया था। 2013 में व्हिसलब्लोअर एडवर्ड स्नोडेन ने अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी से बड़े पैमाने पर खुफिया दस्तावेजों को लीक किया। इन दस्तावेजों से पता चला कि पांच देश न केवल विदेशी देशों और एक-दूसरे पर जासूसी कर रहे थे बल्कि अपने नागरिकों पर डाटा भी एकत्र कर रहे थे और रख रहे थे। सदस्य देश अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उस समय स्वीकार किया था कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां शायद अपनी जासूसी में बहुत आगे निकल गई थीं। 

What is Five Eyes alliance  and why is it not interested in investigating the Nijjar case
जस्टिन ट्रूडो - फोटो : Social Media
कनाडा के आरोपों की जांच में इच्छुक क्यों नहीं है फाइव आइज?
सेंटर फॉर इंटरनेशनल गवर्नेंस इनोवेशन से जुड़े वार्क के मुताबिक इसके साथी कनाडाई अधिकारियों से और अधिक सुनना चाहते हैं कि कनाडाई वास्तव में क्या जानते हैं और उनकी जांच कैसे चल रही है। उनका कहना है कि सभी भागीदारों को भारत पर लगे आरोपों के बारे में जानकारी दी गई थी, लेकिन वे मजबूत बयान देने की प्रतीक्षा में हैं। जानकारों का मानना है कि जब तक कनाडाई अपनी बात आगे नहीं बढ़ा देते, स्वयं जांच करें और अधिक विवरण लेकर आएं तभी कुछ होगा।

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